
समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
नौकरी, कॉलेज में एडमिशन और प्रमोशन दिलाने के नाम पर बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों की फर्जी डिग्री और मार्कशीट बेचने वाले रैकेट का चंद्रपुर में पर्दाफाश हुआ है। दुर्गापुर पुलिस ने इस मामले में तुकुम निवासी परिमल बाबूराव गौरकर (33) और वैभव भोलाराम सोनूले (32) के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने की धाराओं में केस दर्ज किया है।
पुलिस ने आरोपी वैभव सोनूले को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे 28 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। मुख्य आरोपी परिमल गौरकर अभी फरार है। पुलिस निरीक्षक संतोष शेगावकर ने बताया कि मामले की जांच जारी है।
पड़ोसी के घर रखी थैली ने खोला राज
इस रैकेट का खुलासा एक कपड़े की थैली से हुआ। पुलिस के मुताबिक, परिमल गौरकर ने जनवरी में तुकुम के चिंतामणि अपार्टमेंट में रहने वाले वैभव माशीरकर को अपनी कार में रखी एक थैली संभाल कर रखने के लिए दी थी। जब कई दिन तक गौरकर थैली लेने नहीं आया, तो इसकी सूचना पुलिस को दी गई।
थैली की जांच में संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय, सोलापुर विश्वविद्यालय, श्रीधर यूनिवर्सिटी (पिलानी), गोंडवाना विश्वविद्यालय और छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी (कानपुर) के नाम की फर्जी मार्कशीट, डिप्लोमा और माइग्रेशन सर्टिफिकेट मिले। इन पर फर्जी मुहर और हस्ताक्षर होने का शक है।
पुलिस अब जांच कर रही है कि इन फर्जी प्रमाणपत्रों से कितने लोगों ने नौकरी या एडमिशन लिया है। ये प्रमाणपत्र कहां बनाए जाते थे, इसमें कौन-कौन शामिल है और पैसों का लेन-देन कैसे होता था, इन सभी पहलुओं पर जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। थानेदार शेगांवकर के मार्गदर्शन में उपनिरीक्षक रविंद्र नक्कनवार और लखन राठोड मामले की जांच कर रहे हैं।




